भारतीय फुटबॉल के प्रमुख अध्याय
भारत में संगठित फुटबॉल की शुरुआत 1888 में डुरंड कप से हुई, जो एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंटों में से एक है। 1911 में मोहन बागान ने IFA शील्ड जीतकर यह साबित किया कि भारतीय खिलाड़ी अंग्रेज़ टीमों को चुनौती दे सकते हैं — यह पल राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बन गया। स्वतंत्रता के बाद भारत ने 1948 के ओलंपिक में
भाग लिया और 1950 FIFA विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया, हालांकि टीम वहाँ नहीं गई। All India Football Federation के गठन के बाद राष्ट्रीय ढाँचा मजबूत हुआ, और 2014 में Indian Super League के आने से क्लब फुटबॉल को नई ऊर्जा मिली। आज अहमदाबाद जैसे शहरों में भी फुटबॉल अकादमियाँ युवाओं को पेशेवर स्तर के लिए तैयार कर रही हैं।